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Sunday, February 10, 2013

बनें चिर युवा//डेढ़ साल बाद बिकने लगेगी G5 औषधि

9.02.2013, 09:33
नोवोसिबीर्स्क में विकसित औषधि के सारे प्री-क्लीनिकल टेस्ट पूरे
                        © फ़ोटो: ru.wikipedia.org
नोवोसिबीर्स्क के वैज्ञानिकों ने “संजीवनी” खोज ली है| उन्होंने एक अद्वितीय औषधि बनाई है जो मज्जा से स्टेम सेल यानी तना–कोशिकाएं बनवाती है| ये कोशिकाएं किसी भी रुग्ण अंग के पुनरुज्जीवन की क्षमता रखती हैं| सो, इस चमत्कारी औषधि की बदौलत व्यक्ति सदा युवा और स्वस्थ रह सकेगा|

स्टेम सेल से चिकित्सा का तो आजकल फैशन पूरे ज़ोरों पर है| इनसे दिल का दौरा (इन्फेर्क्शन), मस्तिष्क-आघात (ब्रेन हैमरेज) तथा कई तरह की गंभीर चोटों का इलाज करने में मदद मिल सकती है| सौंदर्य-उपचार यानी कोस्मेटोलोजी में तो इनकी सहायता से त्वचा को फिर से युवा बनाने के दावे किए जाते हैं| समस्या बस इतनी है कि इन कोशिकाओं के उपयोग की जो विधि इन दिनों प्रचलित है वह निरापद नहीं है, इस औषधि का विकास करनेवाली कंपनी के जनरल डायरेक्टर आंद्रेई अर्तामोनोव बताते हैं|

देखिए, आजकल काम कुछ इस तरह होता है: अस्थि-मज्जा से ताना-कोशिकाएं निकाली जाती हैं| फिर उन्हें विशेष द्रव्य में रखकर उनकी संख्या बढ़ाई जाती है और इसके बाद उन्हें “रोगी” की रक्त-प्रणाली में पुनः प्रवेशित किया जाता है| ध्यान देने की बात यह है कि इन कोशिकाओं का मल्टीप्लिकेशन मानव-शरीर के बाहर होता है| मानव शारीर में इन्हें डाले जाने के बाद इनका विभेदीकरण कैसे होगा यह कोई नहीं कह सकता – ये रुग्ण अंग में पहुँच कर उस अंग की कोशिकाओं का पुनर्निर्माण कर देंगी तो व्यक्ति स्वस्थ हो जाएगा, लेकिन अगर ये स्वस्थ अंग में पहुँच जाएं तो वहाँ क्या होगा? ह्रदय में पसली उग आई तो? दरअसल ऐसी कोशिकाएं मानव-शरीर के लिए “पराई” ही होती हैं|

अब नोवोसिबिर्स्क के वैज्ञानिकों ने इस समस्या का हल ढूँढ लिया है| उन्होंने G5 कोड-नाम वाली औषधि बनाई है| यह मनुष्य की अस्थि-मज्जा को नई तना-कोशिकाएं बनाने की “प्रेरणा” देती है| ये नवनिर्मित कोशिकाएं स्वयं ही विक्षत अंग को ढूँढ लेती हैं, और उसका “पुनर्निर्माण” कर देती हैं| विशेषज्ञ के शब्दों में G5 औषधि इन “मरम्मती-कोशिकाओं” को “घर” प्रदान कराती है, वे शरीर से बाहर नहीं जातीं| यह पुनरुज्जीवन औषधि है| अब तक संसार में इसका कोई समरूप नहीं है, आंद्रेई अर्तामोनोव कहते हैं:

आज के दिन में ऐसी कोई औषधि नहीं है| हमारी G5 अस्थि मज्जा को अपनी ही तना-कोशिकाएं बनाने की “प्रेरणा” देती है और ये कोशिकाएं मानव शरीर के भीतर ही रहती हैं| ज्यों-ज्यों मनुष्य की आयु बढ़ाती है, त्यों-त्यों उसके शरीर में तन-कोशिकाओं की संख्या कम होती जाती है, अतः हमारे अंगों के पुनरुज्जीवन की प्रक्रिया रुक जाती है, हम बूढ़े होने लगते हैं| अब चिकित्सा-विज्ञान में इस बात के प्रयास हो रहे हैं कि शरीर स्वयं अपने को बहाल करता जाए| 

आज तक सारी चिकित्सा लक्षणों को दूर करने वाली ही है| दर्द हो रहा है – दर्दहारी गोली दवाई ले लो| मानव शरीर में अंतर्निहित क्षमता का उपयोग करना कहीं अधिक मुश्किल काम है, लेकिन सही रास्ता यही है| इसी की बदौलत हम सब “युवा और सुखी हो पाएंगे, यह याद कर पाएंगे कि बचपन में हम कैसे थे|”

नोवोसिबीर्स्क में विकसित औषधि के प्री-क्लीनिकल टेस्ट सारे पूरे हो गए हैं| शीघ्र ही क्लीनिकल टेस्टिंग भी शुरू होगी| यह आशा की जा सकती है कि डेढ़ साल बाद G5 औषधि बिकने लगेगी|(रेडियो रूस से साभार)  
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